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स्वतंत्र दार्शनिक's avatar

तो जी हाँ, “फ़र्क़ तो पड़ता है”,

इस हिंदी कविता में उर्दू घुसाने में,

और आपको बताने में,

कि आख़िर “क्या ही हो जाएगा” ।

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परिवर्तन आता है; जब तुम आसान नहीं लेकिन सही करते हो,

फिर चाहे कितना ही मुश्किल क्यों ना हो, हर बार सही कर जाने में ।

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एक समाज में;

जिसे बदलने में पीढ़ियाँ लगती हैं।

और दूसरा तुम्हारे भीतर;

जो दिखता है, मन की शांति और हौसले में।

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फिर बाहर कितनी ही उथल-पुथल या बर्फीले तूफ़ान क्यों न हो,

तुम्हारे भीतर हमेशा शांत सा बैठा रहता है; एक स्थिर व्यक्तित्व ।

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जो झलकता है तुम्हारे चेहरे पर, एक मंद लेकिन सुकून भरी मुस्कान में ।

और वही देता है तुम्हें हिम्मत लड़ने की, इस ज़िंदगी में आने वाले इम्तिहानों से ।

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